Bhagavad Gita 15.17 — 17
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 15 | श्लोक 17
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उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्मेत्युधाहृतः |यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वरः |
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uttamaḥ puruṣastvanyaḥ paramātmetyudhāhṛtaḥ .yo lokatrayamāviśya bibhartyavyaya īśvaraḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
इन दोनों से उत्तम पुरुष तो अन्य ही है, जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण- पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर और परमात्मा—इस प्रकार कहा गया है |
🌸 English Meaning
The Supreme Person is yet other than these, who, having entered all the three worlds, upholds and maintains all, and has been spoken of as the imperishable Lord and the supreme Spirit.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 15, श्लोक 17
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
