Bhagavad Gita 15.13 — 13
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 15 | श्लोक 13
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गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा |पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः |
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gāmāviśya ca bhūtāni dhārayāmyahamojasā .puṣṇāmi cauṣadhīḥ sarvāḥ somo bhūtvā rasātmakaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
और मैं ही पृथ्वी में प्रवेश करके अपनी शक्ति से सब भूतों को धारण करता हूँ और रस स्वरूप अर्थात् अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात् वनस्पतियों को पुष्ट करता हूँ |
🌸 English Meaning
And permeating the soil, it is I who support all creatures by My vital power; and becoming the nectarine moon, I nourish all pllants.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 15, श्लोक 13
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
