Bhagavad Gita 15.1 — 1
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 15 | श्लोक 1
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श्रीभगवानुवाच |ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् |छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् |
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śrībhagavānuvāca .ūrdhvamūlamadhaḥśākhamaśvatthaṃ prāhuravyayam .chandāṃsi yasya parṇāni yastaṃ veda sa vedavit
📖 सरल हिंदी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा—आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं; तथा वेद जिसके पत्ते कहे गये हैं—उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है, वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है |
🌸 English Meaning
Shree Bhagavan said: He who knows the pipal tree; which is said to be imperishable, having its root above and branches below, and whose leaves are the Vedas—he alone knows the Vedas.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 15, श्लोक 1
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
