Bhagavad Gita 14.23 — 23
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 14 | श्लोक 23
❖ ───── ✦ ───── ❖
उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते |गुणा वर्तन्त इत्येवं योऽवतिष्ठति नेङ्गते |
❧ ✦ ❧
udāsīnavadāsīno guṇairyo na vicālyate .guṇā vartanta ityevaṃ yo.avatiṣṭhati neṅgate
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो साक्षी के सदृश स्थित हुआ गुणों के द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता और गुण ही गुणों में बरतते हैं—ऐसा समझता हुआ जो सच्चिदानन्दघन परमात्मा में एकीभाव से स्थित रहता है एवं उस स्थिति से कभी विचलित नहीं होता|
🌸 English Meaning
He who is indifferent to the modes of nature, and who remains unshaken, knowing that the modes act on the modes, remains established in the Self and is never shaken.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 14, श्लोक 23
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
