Bhagavad Gita 14.2 — 2
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 14 | श्लोक 2
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इदं ज्ञानमुपाश्रित्य मम साधर्म्यमागताः |सर्गेऽपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च |
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idaṃ jñānamupāśritya mama sādharmyamāgatāḥ .sarge.api nopajāyante pralaye na vyathanti ca
📖 सरल हिंदी अर्थ
इस ज्ञान को आश्रय करके अर्थात् धारण करके मेरे स्वरूप को प्राप्त हुए पुरुष सृष्टि के आदि में पुनः उत्पन्न नहीं होते और प्रलयकाल में भी व्याकुल नहीं होते |
🌸 English Meaning
Those who, by practising this wisdom, have entered into My Being are not born again at the cosmic dawn nor feel disturbed even during the cosmic night.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 14, श्लोक 2
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
