Bhagavad Gita 13.32 — 32
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 13 | श्लोक 32
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अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः |शरीरस्थोऽपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते |
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anāditvānnirguṇatvātparamātmāyamavyayaḥ .śarīrastho.api kaunteya na karoti na lipyate
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे अर्जुन! अनादि होने से और निर्गुण होने से यह अविनाशी परमात्मा शरीर में स्थित होने पर भी वास्तव में न तो कुछ करता है और न लिप्त ही होता है ॥
🌸 English Meaning
O Arjuna! Being without beginning and devoid of qualities, this imperishable Supreme Soul, though residing in the body, neither acts nor is affected.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 32
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
