Bhagavad Gita 13.3 — 3
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 13 | श्लोक 3
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क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत |क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज्ज्ञानं मतं मम |
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kṣetrajñaṃ cāpi māṃ viddhi sarvakṣetreṣu bhārata .kṣetrakṣetrajñayorjñānaṃ yattajjñānaṃ mataṃ mama
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे अर्जुन! तू सब क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ अर्थात् जीवात्मा भी मुझे ही जान। और क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का अर्थात् विकार सहित प्रकृति का और पुरुष का जो तत्व से जानना है, वह ज्ञान है—ऐसा मेरा मत है॥
🌸 English Meaning
Know Myself to be the Ksetrajñaalso in all the Ksetras, Arjuna. And it is the knowledge of Ksetra and Ksetrajñawhich I consider as Wisdom.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 3
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
