Bhagavad Gita 12.16 — 16
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 12 | श्लोक 16
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अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः |सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः |
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anapekṣaḥ śucirdakṣa udāsīno gatavyathaḥ .sarvārambhaparityāgī yo madbhaktaḥ sa me priyaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो पुरुष आकांक्षा से रहित, बाहर-भीतर से शुद्ध, चतुर, पक्षपात से रहित और दुःखों से छूटा हुआ है तथा सब प्रकार के आरम्भों का त्याग करने वाला है — वह भक्त मुझको प्रिय है॥
🌸 English Meaning
He who is free from desires, pure, expert, indifferent to pain and pleasure, and who has renounced all undertakings, is dear to Me.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 12, श्लोक 16
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
