Bhagavad Gita 12.13 — 13
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 12 | श्लोक 13
❖ ───── ✦ ───── ❖
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च |निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी |
❧ ✦ ❧
adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca .nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो पुरुष सब भूतों में द्वेषभाव से रहित, स्वार्थरहित, सबका प्रेमी और हेतु रहित दयालु है तथा ममता से रहित, अहंकार से रहित, सुख-दुःखों की प्राप्ति में सम और क्षमावान् है अर्थात अपराध करने वाले को भी अभय देने वाला है;
🌸 English Meaning
He who is free from malice towards all beings, friendly and compassionate, rid of 'I' and 'mine', balanced in pleasure and pain, forgiving—such a devotee is dear to Me
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 12, श्लोक 13
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
