Bhagavad Gita 11.53 — 53
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 53
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नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया |शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा |
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nāhaṃ vedairna tapasā na dānena na cejyayā .śakya evaṃvidho draṣṭuṃ dṛṣṭavānasi māṃ yathā
📖 सरल हिंदी अर्थ
जिस प्रकार तुमने मुझको देखा है—इस प्रकार चतुष्पुर्ज रूप वाला मैं न वेदों से, न तपसे, न दानसे, और न यज्ञ से ही देखा जा सकता हूँ|
🌸 English Meaning
Neither by study of the Vedas nor by penance, nor again by charity, nor even by ritual can I be seen in this formas you have seen Me.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 53
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
