Bhagavad Gita 11.52 — 52
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 52
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श्रीभगवानुवाच |सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम |देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः |
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śrībhagavānuvāca .sudurdarśamidaṃ rūpaṃ dṛṣṭavānasi yanmama .devā apyasya rūpasya nityaṃ darśanakāṅkṣiṇaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा—मेरा जो चतुर्भुज रूप तुमने देखा है, यह सुदर्शन है अर्थात इसके दर्शन बड़े ही दुर्लभ हैं। देवता भी सदा इस रूप के दर्शन की आकांक्षा करते रहते हैं |
🌸 English Meaning
Shree Bhagavan said: This form of Minewhich you have just seen is exceedingly difficult to perceive. Even the gods are always eager to behold this form.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 52
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
