Bhagavad Gita 9.26 — 26
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 26
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पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति |तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः |
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patraṃ puṣpaṃ phalaṃ toyaṃ yo me bhaktyā prayacchati .tadahaṃ bhaktyupahṛtamaśnāmi prayatātmanaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो कोई भक्त मेरे लिये प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुण रूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ|
🌸 English Meaning
Whoever offers Me with devotion a leaf, a flower, a fruit, or water, I accept that pure-hearted devotee’s offering with love.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 26
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
