Bhagavad Gita 9.5 — 5
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 5
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न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् |भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः |
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na ca matsthāni bhūtāni paśya me yogamaiśvaram .bhūtabhṛnna ca bhūtastho mamātmā bhūtabhāvanaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
वे सब भूत मुझ में स्थित नहीं हैं; किंतु मेरी ईश्वरीय योगशक्ति को देख कि भूतों का धारण- पोषण करने वाला और भूतों को उत्पन्न करने वाला भर मेरा आत्मा वास्तव में भूतों में स्थित नहीं है |
🌸 English Meaning
Not in beings do I abide, behold My divine Yoga power. I am the sustainer and creator of beings, yet My Self is not in them.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 5
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
