Bhagavad Gita 8.27 — 27
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 8 | श्लोक 27
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नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन |तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन |
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naite sṛtī pārtha jānanyogī muhyati kaścana .tasmātsarveṣu kāleṣu yogayukto bhavārjuna
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे पार्थ! इस प्रकार इन दोनों मार्गों को तत्व से जानकर कोई भी योगी मोहित नहीं होता। इस कारण हे अर्जुन! तू सब काल में समबुद्धि रूप योग से युक्त हो अर्थात् निरन्तर मेरी प्राप्ति के लिये साधन करने वाला हो |
🌸 English Meaning
Knowing thus the secret of these two paths, O son of Kunti, no Yogi gets deluded. Therefore, Arjuna, at all times be steadfast in Yoga in the form of equanimity.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 27
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
