Bhagavad Gita 8.25 — 25
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 8 | श्लोक 25
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धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणायनम् |तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते |
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dhūmo rātristathā kṛṣṇaḥ ṣaṇmāsā dakṣiṇāyanam .tatra cāndramasaṃ jyotiryogī prāpya nivartate
📖 सरल हिंदी अर्थ
जिस मार्ग में धूमाभिमानी देवता है, रात्रि-अभिमानी देवता है तथा कृष्ण पक्ष का अभिमानी देवता है और दक्षिणायन के छः महीनों का अभिमानी देवता है, उस मार्ग में मरकर गया हुआ सकाम कर्म करने वाला योगी उपयुक्त देवताओं द्वारा क्रम से ले गया हुआ चन्द्रमा की ज्योति को प्राप्त होकर स्वर्ग में अपने शुभ कर्मों का फल भोगकर वापस आता है |
🌸 English Meaning
The other path is that wherein are stationed the gods presiding over smoke, night, the dark fortnight, and the six months of the southward course of the sun; the Yogitaking to this path after death is led by the above gods, one after another, and attaining the lustre of the moonreturns to this mortal world.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 25
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
