Bhagavad Gita 8.11 — 11
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 8 | श्लोक 11
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यदक्षरं वेदविदो वदन्तिविशन्ति यद्यतयो वीतरागाः |यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्तितत्ते पदं संग्रहेण प्रवक्ष्ये |
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yadakṣaraṃ vedavido vadanti viśanti yadyatayo vītarāgāḥ .yadicchanto brahmacaryaṃ caranti tatte padaṃ saṃgraheṇa pravakṣye
📖 सरल हिंदी अर्थ
वेद के जानने वाले विद्वान् जिस सच्चिदानन्दधन रूप परमपद को अविनाशी कहते हैं, आसक्ति रहित यतशील संन्यासी महात्माजन जिसमें प्रवेश करते हैं और जिस परमपद को चाहने वाले ब्रह्मचारी लोग ब्रह्चर्य का आचरण करते हैं, उस परम पद को मैं तेरे लिये संक्षेप से कहूँगा |
🌸 English Meaning
I shall tell you briefly about that supreme goal, which the knowers of the Veda term as the Indestructible; which striving recluses free from passion enter, and
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 11
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
