Bhagavad Gita 7.1 — 1
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 7 | श्लोक 1
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श्रीभगवानुवाच |मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः |असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु |
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śrībhagavānuvāca .mayyāsaktamanāḥ pārtha yogaṃ yuñjanmadāśrayaḥ .asaṃśayaṃ samagraṃ māṃ yathā jñāsyasi tacchṛṇu
📖 सरल हिंदी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा—हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझ में आसक्त चित तथा अनन्य भाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्यादि गुणों से युक्त, सबके आत्मरूप मुझको संशयरहित जानेगा, उसको सुन।
🌸 English Meaning
Shree Bhagavan said: Arjuna, now listen how with the mind attached to Meand practising Yoga with absolute dependence on Me, you will know Me (the
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 7, श्लोक 1
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
