Bhagavad Gita 6.31 — 31
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 31
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सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः |सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते |
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sarvabhūtasthitaṃ yo māṃ bhajatyekatvamāsthitaḥ .sarvathā vartamāno.api sa yogī mayi vartate
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो पुरुष एकीभाव से स्थित होकर सम्पूर्ण भूतों में आत्मरूप से स्थित मुझ सच्चिदानन्दघन वासुदेव को भजता है, वह योगी सब प्रकार से बरतता हुआ भी मुझ में ही बरतता है |
🌸 English Meaning
The Yogi who is established in union with Me, and worships Me as residing in all beings; abides in Me; no matter what he does.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 31
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
