Bhagavad Gita 6.10 — 10
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 10
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योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः |एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः |
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yogī yuñjīta satatamātmānaṃ rahasi sthitaḥ .ekākī yatacittātmā nirāśīraparigrahaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
मन और इन्द्रियों सहित शरीर को वश में रखने वाला, आशारहित और संग्रहरहित योगी अकेला ही एकान्त स्थान में स्थित होकर आत्मा को निरन्तर परमात्मा में लगावे |
🌸 English Meaning
Living in seclusion all by himself, the Yogi who has controlled his mind and body, and is free from desires and void of possessions, should constantly engage his mind in meditation.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 10
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
