Bhagavad Gita 5.5 — 5
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 5 | श्लोक 5
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यत्साङ्ख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते |एकं साङ्ख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति |
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yatsāṅkhyaiḥ prāpyate sthānaṃ tadyogairapi gamyate .ekaṃ sāṅkhyaṃ ca yogaṃ ca yaḥ paśyati sa paśyati
📖 सरल हिंदी अर्थ
ज्ञानयोगियों द्वारा जो परमधाम प्राप्त किया जाता है, कर्मयोगियों द्वारा भी वही प्राप्त किया जाता है। इसलिये जो पुरुष ज्ञान योग और कर्मयोग को फलस्वरूप में एक देखता है, वही यथार्थ देखता है|
🌸 English Meaning
Thestate which is reached by the Sankhyayogi is attained also by the Karmayogi. Therefore, he alone who sees Sankhyayoga and Karmayoga as onereally sees.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 5, श्लोक 5
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
