Bhagavad Gita 5.1 — 1
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 5 | श्लोक 1
❖ ───── ✦ ───── ❖
अर्जुन उवाच |संन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि |यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् |
❧ ✦ ❧
arjuna uvāca .saṃnyāsaṃ karmaṇāṃ kṛṣṇa punaryogaṃ ca śaṃsasi .yacchreya etayorekaṃ tanme brūhi suniścitam
📖 सरल हिंदी अर्थ
अर्जुन ने कहा—हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे लिये भलीभाँति निश्चित कल्याणकारक साधन हो, उसको कहिये|
🌸 English Meaning
Arjuna said Krishna, you extol sankhyayogaand then the yoga of Action. Pray tell me which of the two is decidedly conducive to my good.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 5, श्लोक 1
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
