Bhagavad Gita 4.21 — 21
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 21
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निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः |शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् |
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nirāśīryatacittātmā tyaktasarvaparigrahaḥ .śārīraṃ kevalaṃ karma kurvannāpnoti kilbiṣam
📖 सरल हिंदी अर्थ
जिसका अन्तःकरण और इन्द्रियों के सहित शरीर जीता हुआ है और जिसने समस्त भोगों की सामग्री का परित्याग कर दिया है, ऐसा आशारहित पुरुष केवल शरीर-सम्बन्धी कर्म करता हुआ भी पाप को नहीं प्राप्त होता |
🌸 English Meaning
Having subdued his mind and body, and given up all objects of enjoyment, and free from craving; he who performs sheer bodily actions, does not incur sin.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 21
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
