Bhagavad Gita 4.18 — 18
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 18
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कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः |स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत् |
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karmaṇyakarma yaḥ paśyedakarmaṇi ca karma yaḥ .sa buddhimānmanuṣyeṣu sa yuktaḥ kṛtsnakarmakṛt
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो मनुष्य कर्म में अकर्म देखता है और जो अकर्म में कर्म देखता है, वह मनुष्यों में बुद्धिमान है और वह योगी समस्त कर्मों को करने वाला है।
🌸 English Meaning
He who sees inaction in action, and action in inaction, is wise among men; he is a yogi, who has performed all action.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 18
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
