Bhagavad Gita 2.56 — 56
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 56
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दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः |वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते |
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duḥkheṣvanudvignamanāḥ sukheṣu vigataspṛhaḥ .vītarāgabhayakrodhaḥ sthitadhīrmunirucyate
📖 सरल हिंदी अर्थ
दुःखों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में उद्वेग नहीं होता, सुखों की प्राप्ति में जो सर्वथा निःस्पृह है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गये हैं, ऐसा मुनि स्थिर बुद्धि कहा जाता है |
🌸 English Meaning
The sage, whose mind remains unperturbed amid sorrows, whose thirst for pleasure has altogether disappeared, and who is free from passion, fear and anger, is called stale of mind.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 56
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
