Bhagavad Gita 2.41 — 41
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 41
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व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन |बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम् |
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vyavasāyātmikā buddhirekeha kurunandana .bahuśākhā hyanantāśca buddhayo.avyavasāyinām
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे अर्जुन ! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिका बुद्धि एक ही होती है; किंतु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चय ही बहुत भेदोंवाली और अनन्त होती हैं |
🌸 English Meaning
Arjuna, in this Yogathe intellect is determinate and directed singly towards one ideal; whereas the intellect of the undecidedwanders in all directions, after innumerable aims.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 41
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
