Bhagavad Gita 1.45 — 45
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 1 | श्लोक 45
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अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् |यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः |
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aho bata mahatpāpaṃ kartuṃ vyavasitā vayam .yadrājyasukhalobhena hantuṃ svajanamudyatāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
हा ! शोक ! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान् पाप करने को तैयार हो गये हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिये उद्यत हो गये हैं |
🌸 English Meaning
Oh what a pity! Though possessed of intelligence we have set our mind on the commission of a great sin in that due to lust
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1, श्लोक 45
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
